Tuesday, July 8, 2014

दिन निकल आया है

वहां पहाड़ों पर
दिन निकल आया है
लेकिन घाटी में बैठा मैं
अभी उस दिन की
कुछ ही किरणें देख पाया हूँ

दिन की भरपूर रौशनी के लिए
अभी कुछ देर और
इंतज़ार करना है मुझे
फिर भी
मैं इस बात से खुश हूँ
कि पहाड़ों पर ही सही
दिन निकला तो है
ये रौशनी छलकाते पहाड़
बता रहे हैं कि
कुछ देर में
मुझ तक भी पहुँचेगी
दिन की भरपूर रौशनी
क्योंकि पहाड़ों पर
दिन निकल आया है

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