Friday, January 22, 2010

तू और मैं

तेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव
अमावस की रात से भी अंधेरी है
लेकिन मेरे दुःखों का अंधेरा
उससे ज़्यादा घना है।
तेरे जिस्म से
फूलों से भी अच्छी सुगंध आती है
लेकिन मुझे रोटी की सुगंघ
उससे भी अच्छी लगती है।
तेरी भावनाओं में
मुझे पता है
बहुत गर्मी है
लेकिन
सर्दी से बजती हुई हड्डियों को
चुप कराने के लिए
वो काफ़ी नहीं है।

रवि कांत 'अनमोल'

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