Friday, January 22, 2010

पूर्वोत्तर भारत

पूर्वोत्तर भारत (फ़रवरी २००६ में शिलांग में लिखी गई कविता)

ये वादियों में दूर तक फैली हुई झीलें
गाहे-बगाहे इनमें नज़र आती किश्तियाँ
जंगल के बीच बीच में लहराती ये सड़कें
गाहे-बगाहे उनपे आती जाती गाड़ियाँ
सरसब्ज़ पहाड़ों की सियह रंग यह मिट्टी
मिट्टी से खेलते हुए मासूम से बच्चे
ये चाय के बागों में गा के झूमती परियाँ
जंगल में काम करते कबीले के लोगबाग
मिट्टी से सराबोर मिट्टी के दुलारे
बाँसों के झुरमुटों में मचलती ये हवाएँ
हैरत में डालती हुई ये शोख़ घटाएँ
दिल खींच रहे हैं तेरे रंगीन नज़ारे
आकाश से उतरा है जो ये हुस्न ज़मीं पर
जी चाहता है आज कि ऐ बादलों के घर १
ये हुस्न तेरी वादियों का साथ ले चलूँ।

१. मेघालय
 
रवि कांत 'अनमोल'

No comments:

Post a Comment